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सुनहरे पल

 

सुनहरे  पल 

सुनहरे काले बालो की चमक ,
अब  उड़ चूकी है। 
सतरंगी उमड़े बादल  की उमग ,
अब थम चुकी है। 

जीवन में प्रेम की बरसात ,
वोतो कभी की बंद हो चुकी है। 

फिर क्यों इंतज़ार उन पलों का ,
 जो खो   चुके  है  कही। 

जिनसे आशा थी  मन को बहलायगे कभी ,
सभी गुम  हुए एक एक करके कही। 

अब अँधेरी राते  कटती नहीं ,
 रोशनी में भी कोई आस लगती नहीं।

भूल जाओ जमाने को ,जिसने तुमको भुला दिया ,
आओ फिर दीये जलाये जिंदगी के।

जीने की प्यास कभी बुझने न दे ,
अभी कई और है मंजिले आसमा में।

जिनको छूने की  तम्मना रहने दो,
फिर लिखेंगे नया फलसफा   जिंदगी का।


द्वारा  : कमल कुमार 
०१/११/२०१७ 












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