मै लाल कमल हू,
रंग बिरंगा फूल हू।
कीचड़ में जन्मा हू ,
फिर भी अच्छा लगता हू ।
हर कोई मुझे ,
तोड़ता रोंदता है
मेरे लहू को,
गंदे पानी में छोड़ता है।
मेरी जड़ो को ,
उखाड़कर खा जाता है।
दिखने में सुन्दर ,
पर कोई सुगंध आती नहीं ।
सभी देवो का सिंहासन ,
पर सर का ताज नहीं।
कष्टों को झेलना ,
अब आदत सी बन चुकी है।
घर में मुझे कोई ,
अक्सर सम्मान से रखता नहीं।
मैं जिंदगी हू ,
गरीबी में जन्मी हू।
फिर भी प्यारी लगती हू ,
पर हर कोई ,
मुझे तोड़ता रूठता है।
मैं कमल .......
द्वारा : कमल कुमार "आज़ाद"
15/11/2017
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रंग बिरंगा फूल हू।
कीचड़ में जन्मा हू ,
फिर भी अच्छा लगता हू ।
हर कोई मुझे ,
तोड़ता रोंदता है
मेरे लहू को,
गंदे पानी में छोड़ता है।
मेरी जड़ो को ,
उखाड़कर खा जाता है।
दिखने में सुन्दर ,
पर कोई सुगंध आती नहीं ।
सभी देवो का सिंहासन ,
पर सर का ताज नहीं।
कष्टों को झेलना ,
अब आदत सी बन चुकी है।
घर में मुझे कोई ,
अक्सर सम्मान से रखता नहीं।
मैं जिंदगी हू ,
गरीबी में जन्मी हू।
फिर भी प्यारी लगती हू ,
पर हर कोई ,
मुझे तोड़ता रूठता है।
मैं कमल .......
द्वारा : कमल कुमार "आज़ाद"
15/11/2017
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