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सिसकता सागर

सिसकता सागर 

हंसी के चाह में ,
यूही उम्र  गुजर गयी। 
कोशिश  जो की मुस्कुराने की ,
चुपचाप रूलाया अपनों ने। 

मोती एक अनमोल रतन   है ,
रहता सागर की गहराई में। 
सुख भी एक मोती जैसा ,
खोया जीवन के खाई में। 
दुःख में भी है हॅसने का मजा ,
चुपचाप  दिखाया  लहरों ने। . 


सिखाया सबक़ जिंदगी ने ,
शांत सागर की  लहरों ने। 
छल कपट मिलते है अक्सर ,
अपने ही अजीज लोगो से। 
उदासियों में भी चंचल होना ,
चुपचाप सिखाया लहरों ने। 


जीवन भी है सागर के माफिक ,
कभी उछलता कभी मचलता। 
सपने देखे जो कल के लिए, 
वर्तमान में जीना सीखो। .
गिर गिर कर  कैसे उठते है ,
 सीखो  सागर की लहरों से । 


द्वारा : कमल कुमार 
13/11/2017





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