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वफ़ा

 

       वफ़ा 














वफ़ा कर नहीं सका ,
चलो  तो बेवफा ही सही। 
मेहंदी  रच नहीं  सकी ,
तो कोरे हाथ ही  सही।  

तुमने किसी गैर को चाहा 
चलो अच्छा ही किया। 
मुहब्बत  में मिटने का डर 
अब मुझमे नहीं। 

तुम बनो दुल्हन किसी रहीस की 
चलो में रस्ते का फ़क़ीर ही सही। 

द्वारा : कमल कुमार 
दिनांक : १३/११/२०१७

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