कमल का फूल : एक कविता मै लाल कमल हू, रंग बिरंगा फूल हू। कीचड़ में जन्मा हू , फिर भी अच्छा लगता हू । हर कोई मुझे , तोड़ता रोंदता है मेरे लहू को, गंदे पानी में छोड़ता है। मेरी जड़ो को , उखाड़कर खा जाता है। दिखने में सुन्दर , पर कोई सुगंध आती नहीं । सभी देवो का सिंहासन , पर सर का ताज नहीं। कष्टों को झेलना , अब आदत सी बन चुकी है। घर में मुझे कोई , अक्सर सम्मान से रखता नहीं। मैं जिंदगी हू , गरीबी में जन्मी हू। फिर भी प्यारी लगती हू , पर हर कोई , मुझे तोड़ता रूठता है। मैं कमल ....... द्वारा : कमल कुमार "आज़ाद" 15/11/2017 ''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''...
Life is like Dhokla . A gujrati receipe

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