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विकास या विनाश


विकास या विनाश 











पर्यावरण के विनाश से ,
जो विकास कर  रहे है। 
वास्तव में तो वो ,
नस्लों को बर्बाद कर रहे है। 
खुदा उनको अकल दे  ,
ऐसा घिनोना ,
जो काम कर रहे है। 

प्रदूषण के जहर से ,
उजाले  में अंधकार हो गया है। 
बात अचरज़ की है ,
अम्लीय बरसात का उदय हो रहा है। 
 अंधी दौड़ में हम कहा आ गए ,
शुद्ध हवा का पड़ा अकाल ,
सबकी आंखे है बस लाल , 
ख़ुदा उनको अकल दे ,
 विकास के नाम पर ,
जो बीमारिया दे रहे है। 

 वृक्षों के अभाव से ,
धरती गर्मी से झुलसने लगी है। 
पानी को तरसते ,
सभी हाहाकार करने लगे है 
हरी भरी खेती, 
 अब बंजर होने लगी  है। 
अकाल मृत्यु की ओर,  
हम बढ़ने लगे है। 
खुदा उनको अकल दे,
जिस डाल पर बैठे 
देखो उसी  को काट रहे है। ..

पर्यावरण के विनाश से ,
जो विकास कर रहे है। 
असल में तो नस्ल को बर्बाद कर रहे है।  


द्वारा : कमल कुमार 
१४/११/२०१७ 




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