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जिन्दगी




जिन्दगी



चिन्ता की सेज़ पर ,
पिंघलतीं है जिंदगी। 

अंगारों की मेज़ पर ,
जलती है जिंदगी। 

सागर में लहरों  की तरह ,
पथ्थरो से टकराती  है जिंदगी। 

अगर रुक जाये  जिंदगी 
तालाब  की तरह सड़ जाये है जिंदगी। 

जिंदगी कभी बहार तो 
कभी पतझड़ है जिंदगी 

कभी नदी में बहता पानी है जिंदगी 
आड़े तिरछे बहाव  की तरह है जिंदगी 

टिमटामटे तारे की तरह है जिंदगी 
काले बादल में कड़कती  जिंदगी 


रात्रि  काले अँधेरे की  चादर 
सुबह सुर्य की रौशनी में चमकती है   जिंदगी। 

गिटार के तारो के तरह कभी 
सुर बेसुर  बजती है जिंदगी 

फूलो के बिस्तर पर 
प्यार में मचलती है जिंदगी 

सुख दुःख के साथ  कभी 
आँसुओ में कटती है जिंदगी। 

ये अजीब है  जिंदगी, 
पता नही कहा ले जाएगी जिंदगी 

ठंडी गरम  हवाओ में ,
छिपा है   रह्स्य जिंदगी का 

पता नहीं तूफ़ान के किसी  छोर पर ,
एक दिन दफ़न होगी जिंदगी.. 

रुक जाएगी एक दिन जिंदगी ,,
पानी के बुलबले  की तरह उड़  जायेगी जिंदगी 

शायद यही है जिंदगी। 


द्वारा :; कमल कुमार  
दिनांक ; ०१/०९/२०१९ मॉडिफाइड 










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